श्री सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् | Siddha Kunjika Stotram | Siddha Kunjika Stotram PDF

श्री सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्  | Siddha Kunjika Stotram

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ परम कल्याणकारी है। इस स्तोत्र का पाठ मनुष्य के जीवन में आ रही समस्या और विघ्नों को दूर करने वाला है।  इस में माता की सभी रूपों की अस्तुति  वर्णित है  और  इस स्रोत्र के बिना सप्तशती  पाठ का फल आधा  माना जनता है |  ऐसा  उल्लेख  सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्  के  पाठ में वर्णित है | 

 

what is siddha kunjika stotram ? (क्या है  सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्  ?)

सिद्ध कुंजिका स्तोत्र  का वर्णन श्रीरुद्रयामल के गौरीतंत्र में है | इस पवित्र स्तोत्र  में  माता पार्वती (maa parvati) और भगवन  शिव का संवाद वर्णित है | जिस में भगवान भोलेनाथ माता पार्वती को  सिद्धकुञ्जिका मंत्र का ज्ञान प्रदान  करते है और
माता पार्वती से इस मंत्र को गुप्त रखने और अधर्मी और  भक्त हीन  इंसान को न देने की बात कहते क्यों की मंत्र का प्रभाव का तीव होता है  और यथा संभव अधर्मी और  भक्त हीन  इंसान इस मंत्र  का गलत प्रयोग कर सकता है |
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति ||

 

Siddha Kunjika Stotram

॥सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्॥

शिव उवाच
शृणु देवि प्रवक्ष्यामि, कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्।
येन मन्त्रप्रभावेण चण्डीजापः शुभो भवेत॥१॥
न कवचं नार्गलास्तोत्रं कीलकं न रहस्यकम्।
न सूक्तं नापि ध्यानं च न न्यासो न च वार्चनम्॥२॥
कुञ्जिकापाठमात्रेण दुर्गापाठफलं लभेत्।
अति गुह्यतरं देवि देवानामपि दुर्लभम्॥३॥
गोपनीयं प्रयत्‍‌नेन स्वयोनिरिव पार्वति।
मारणं मोहनं वश्यं स्तम्भनोच्चाटनादिकम्।
पाठमात्रेण संसिद्ध्येत् कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम्॥४॥
अथ मन्त्रः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल
ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥
इति मन्त्रः
नमस्ते रूद्ररूपिण्यै नमस्ते मधुमर्दिनि।
नमः कैटभहारिण्यै नमस्ते महिषार्दिनि॥१॥
नमस्ते शुम्भहन्त्र्यै च निशुम्भासुरघातिनि।
जाग्रतं हि महादेवि जपं सिद्धं कुरूष्व मे॥२॥
ऐंकारी सृष्टिरूपायै ह्रींकारी प्रतिपालिका।
क्लींकारी कामरूपिण्यै बीजरूपे नमोऽस्तु ते॥३॥
चामुण्डा चण्डघाती च यैकारी वरदायिनी।
विच्चे चाभयदा नित्यं नमस्ते मन्त्ररूपिणि॥४॥
धां धीं धूं धूर्जटेः पत्‍‌नी वां वीं वूं वागधीश्‍वरी।
क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि शां शीं शूं मे शुभं कुरु॥५॥
हुं हुं हुंकाररूपिण्यै जं जं जं जम्भनादिनी।
भ्रां भ्रीं भ्रूं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः॥६॥
अं कं चं टं तं पं यं शं वीं दुं ऐं वीं हं क्षं।
धिजाग्रं धिजाग्रं त्रोटय त्रोटय दीप्तं कुरु कुरु स्वाहा॥७॥
पां पीं पूं पार्वती पूर्णा खां खीं खूं खेचरी तथा।
सां सीं सूं सप्तशती देव्या मन्त्रसिद्धिं कुरुष्व मे॥८॥
इदं तु कुञ्जिकास्तोत्रं मन्त्रजागर्तिहेतवे।
अभक्ते नैव दातव्यं गोपितं रक्ष पार्वति॥
यस्तु कुञ्जिकाया देवि हीनां सप्तशतीं पठेत्।
न तस्य जायते सिद्धिररण्ये रोदनं यथा॥
इति श्रीरुद्रयामले गौरीतन्त्रे शिवपार्वतीसंवादे कुञ्जिकास्तोत्रं सम्पूर्णम्।
॥ॐ तत्सत्॥

 Siddha Kunjika Stotram का पाठ कैसे करे ?

सिध्कुंजिका स्रोत्र का पाठ नित्य दिन दैनिक क्रिया से निवृत हो किया जाना चाइये |  हमारे शास्त्र में शुद्धता और  शुद्धता को  बहुत महत्वा  दिया जाता है | अतः जातक को शारीरिक और मानशिक दोनों शुद्धता का ध्यान रखना चाइये |सिध्कुंजिका स्रोत्र  का पाठ लाल आसन पे बैठ कर करना चाइये  और अगर साधक के पास लाल  वस्त्र हो तो  और भी अच्छा उसे पहन  कर पूजा या पाठ करना चाइये |

पाठ के लिए दिशा कौन  सी हो ?

पाठ के लिए दिशा उत्तर  या पूर्ब  मुख रख कर सकते है 

how many times to read siddha kunjika stotram ?

(कितनी  बार पाठ कर सकते है  सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्  की  ? )

सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् का पाठ एक दिन में दो बार किया जा सकता  है |  एक तो शुबह 4 से 6  के बीच में और एक शंध्या 6 बजे के बाद  किया जा  सकता है |

सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्  का पाठ  नवरात्री(Navratri 2020) में विशेष  फलित होता है | 

 

Benefits of Siddha Kunjika Stotram 

(सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् पाठ से क्या लाभ होता है ?)

सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् पाठ से  धन सुख शांति और माँ की अशीम कृपा प्राप्त होती है , अतः सभी माता के भक्तो को  सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम् का पाठ  निष्काम भावना के साथ करना चाइये   आप  लोगो पर माँ अपनी कृपा  बनये  रखे जय माता दी  | 

 

Siddha Kunjika Stotram  video with Lyrics 

 

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